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बॉम्बे नॅच्युरल हिस्ट्री सोसायटी
(बीएनएचएस)
(www.bnhs.org)
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प्राकृतिक इतिहास
के विषय पर निरिक्षणों की जानकारी का आदानप्रदान करने और जीव
प्रारुपों का सादरिकरण करने हेतु बॉम्बे नॅच्युरल हिस्ट्री सोसायटी
(बीएनएचएस) इस संस्था की स्थापना सन १८८३ में की गई। प्रकॄती तथा
प्राकॄतिक संसाधनों के संवर्धन, शिक्षा एवं संसाधनपर काम करनेवाली
बीएनएचएस भारतीय उपखंड की सबसे बडी गैरसरकारी संस्था मानी जाती है। इसके सदस्य तकरीबन ३० देशों में फ़ैले हुए हैं ।
निसर्ग संवर्धन पूरी तरह से शास्त्रीय अन्वेषण पर आधारभुत होना
चाहिए, स्व. डॉ. सलिम अली के इस मार्गदर्शक तत्व के साथ बीएनएचएस
आजभी कटिबध्द है।
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बीएनएचएस के
महत्वपूर्ण पक्षी प्रकल्प
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प्रारुप संग्रह विभाग
भारतीय वन्यजीवोसंबंधी अंग्रेजों के जमाने से विद्यमान घडी तक
संकलित की गई, ज्यादातर जानकारी मे बीएनएचएस का महत्वपूर्ण योगदान
रहा है। जिसे भारत की बहुमुल्य राष्ट्रीय सम्पत्ती माना जाता है,
ऐसे २६,००० पक्षी, ७५०० उभयचर और सर्पणशील प्राणी, साथही ५०,०००
किट्कों के जीव प्रारुप बीएनएचएस के संग्रह विभाग में सुरक्षित रखे
गए है। भारतभर के दुर्लभ प्रजातीयों के प्रारुप भी इनमे शामिल है
और यह इस संग्रह का एक सबसे बडा आकर्षण है।
पुस्तकालय
वन्यजीव और पर्यावरण, इस विषयपर एक शतक से भी पुरानी शिकारकथाएँ तथा
विभिन्न किताबें, शास्त्रीय वार्तापत्र इनका समावेश होनेवाला, भव्य
पुस्तकालय बीएनएचएस के हॉर्नबिल सदन में बसा हुआ है। पूरी दुनिया
में इतरत्र कहीं पे भी न पाई जानेवाली, दुर्लभ, अतिसुंदर, अवर्णनीय
ऐसे पाषाणछाप चित्रों का संग्रह, इस पुस्तकालय की शान बढा रहे है।
निसर्ग संवर्धन शिक्षा विभाग
यह विभाग हर साल तकरीबन १०,००० विद्यार्थियों तक निसर्ग संवर्धन का
संदेश पहँचाता है। हाल ही में जागतिक विकास प्रशासन, यु.के. इनकी
मदद से यह विभाग "लोकसहभाग से पर्यावरणीय समस्याओं का निराकरण",
करने के हेतु नई पध्दती से शिक्षा अभियान चला रहा है।
संवर्धन विभाग
इस विभाग की तरफ़ से सलिम अली निसर्ग संवर्धन निधी उपक्रमांतक, समाज
के विभिन्न स्तरोमें निसर्ग जनजागृती अभियान गठित किये जाते है।
इसके साथहि सैन्य, प्रशासन, वन, प्रसारमाध्यम एवं अन्य सेवा
क्षेत्रों में से लोगों के लिए पर्यावरण शिक्षा
विश्वविद्यालय विभाग
प्राणीशास्त्र और वनस्पतीशास्त्र इन विषयों के स्नातकोत्तर शिक्षण
हेत, बीएनएचएस यह संस्था सन १९५७ से मुंबई विश्वविद्यालय से संलग्न
है। बिएनएचएस से पी.एच. डि. लिए हुए वैज्ञानिक आज भी विभिन्न शोध
संस्थाओमे अपना नाम बनाए हुए है।
संशोधन विभाग
बीएनएचएस यह संस्था २०वि सदी के शुरुवात से ही, भारतीय उपखंड के
वन्यजीव अभ्यासकी उद्गाती रही है। भारतीय पक्षीयों के अभ्यास
शुरुवात, सर्वप्रथम स्व. डॉ. सलिम अलि निदेशनमेहि हुइ थी। साथहि
श्री हुमायुन अब्दुलालीजीने अंदमान और निकोबार द्विपसमुह के जीवों
का बारिकी से अभ्यास किया। इन सभी अभ्यासों के नतिजों के रिकार्ड,
बिएनएचएस की पुस्तकालय में उपलब्ध हैं।
बिएनएचएस ने अनेक दुर्लभ, संकटग्रस्त प्रजाती और उनके अधिवासों पर
अनुसंधान प्रकल्प चलाए, जिनमे से कुछ महत्वपूर्ण प्रकल्प हैं जैसे
आशियायी हाथी, गोडावण, खडमोर, चरज, जर्डनकि नुकरि, पक्षी प्रवसन
अभ्यास, हवाई जहाजों को पक्षियों से धोखा, बर्ड फ़्लु सर्वेक्षण तथा
पॉइंट कॅलिमियर वन्यजीव अभयारण्य और केवलादेव नॅशनल पार्क का
पारिस्थितीकी अभ्यास |
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