’जर्डन’की नुकरि प्रकल्प

निधी - मोहम्मद बिन झायेद प्रजाती संवर्धन निधी आणि रॉयल सोसायटी फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ बर्डस (आर.एस.पी.बी.)
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’जर्डन’की नुकरि के बारे में:
१.  यह पक्षी निशाचर और जमीनपर दौडनेवाला है।
२.  पिछले ८६ वर्षोंसे लुप्त हो गया है ऐसा माना जाता था।
३.  १९८६ में फ़िर से पाया गया।
४.  आंध्र प्रदेशके मर्यादित मर्यादित प्रदेशमहि इसका वास्तव्य है ।
५.  मुख्यतः श्री लंकामल्लेश्वर वन्याजीव अभयारण्यमे पाया जानेवाला।
६.  भारत के १३ लुप्त होने के समीप माने जानेवाले पक्षियों में से एक।
७.  एकही जगह पायी जानेवाली दिनबदिन कम होती जा रही छोटीसी संख्या।

 

पिछले अभ्यासका पुनरावलोकन:
१.  ’लुप्त होनेवाली प्रजाती’यओंपर बीएनएचएस और यू.एस. फ़िश अँड वाइल्डलाईफ़ सर्व्हिसेस इनके सहभागसे (१९८६) किया हुआ अभ्यास प्रकल्प।
२.  मई १९९४-अक्त्तूबर १९९५ - श्री लंकामल्लेश्वर में बीएनएचएस ने किया हुआ सर्वेक्षण।
३.  १९९७ - कडप्पा जिले में शुरु किया हुआ अभ्यास।

 

अभ्यासकी पद्धती:
१.  रात के वक्त्त खोजना
२.  उनकी आवाजे सुनना
३.  साद-प्रतिसाद अभ्यास (टेप के सहाय्य से)
४.  कॅमेरा ट्रॅप
५.  ट्रॅकिंग स्ट्रिप्स


संघ:
१.  डॉ. ए.आर. रहमानी (संचालक, बीएनएचएस)      
२.  डॉ. रिस ग्रीन, केंब्रिज यूनिवर्सिटी (आर.एस.पी.बी.)
३.  डॉ. केन नॉरिस, रीडिंग यूनिवर्सिटी
४.  श्री. इयन बार्बर (आर.एस.पी.बी.)

५. राहुल चव्हाण

६ डॉ. पी जगन्नाथन (एन.सी.एफ़.)

 

संपर्क: अधिक जानकारीके लिए डॉ. ए. आर. रहमानी, संचालक, बीएनएचएस इन्हे bnhs@bom3.vsnl.net.in, इस ई-मेल पर या  ९१-२२-२२८२१८११ इस दूरध्वनी पर संपर्क किजिए।

 

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