भारत के संकटग्रस्त पक्षी और जागतिक निसर्ग संवर्धन संघकि लाल सूची

IUCN (International Union for Conservation of Nature) मतलब जागतिक निसर्ग संवर्धन संघ सभी प्रकारके प्रजातीयोंका वर्गीकरण करता है और बर्ड़लाईफ़ इंटरनॅशनल यह संकटग्रस्त पक्षीयोंका वर्गीकरण करनेवाली प्राधिकरण संस्था है।

 

भारत के संकटग्रस्त पक्षीयों का वर्गीकरण और उसके मानदंड

 

१. लुप्त होने के समीप  हुए Critically Endangered (CR): Click here to see the details of the birds under this category

जब कोई वन्य प्रजातीकि नजदिक समयमे उसके नैसर्गिक अधिवाससे नष्ट होनेकि संभावना होती है, और जो प्रजाती नीचे दिए हुए मानदंड पार करती है उस प्रजातके पक्षीको संकटग्रस्त सूचीमे शामिल किया जाता है।

A - जिनकि संख्यामे पिछ्ले दस सालोमें, या पिछली ३ पिढियोंमे ८०% सेभी ज्यादा पतन दिखायी दे गया हो।

B - जिस प्रजातीके पक्षीयोंका वितरण लगभग १०० चौकिमी से कम क्षेत्रफ़लमेहि पाया जाता हो या फ़िर उनका वाकया कुल १० चौकिमी इतने सीमित प्रदेशमेहि दिखायी देता हो, ऐसे पक्षी।

C - जिनकि संख्या २५० या उससे कम प्रौढ पक्षी इतनीहि शेष रह गयी हो।

D - कुछ गणीतीय विश्लेषण अनुसार आनेवाले दस सालोमें या फ़िर अगली ३ पिढियोंमे लगभग ५०% या उससे ज्यादा पक्षी उनके नैसर्गिक अधिवासमेसे नष्ट हो सकते है ऐसी प्रजाती।

 

२. लुप्त होनेके मार्गपर चल रहे Endangered (EN): Click here to see the details of the birds under this category

जब कोई वन्य प्रजातकि नजदिक समयमे उसके नैसर्गिक अधिवाससे शीघ्र नष्ट होनेकि संभावना नहि हो, लेकिन आनेवाले समयमे जो लुप्त हो सकती है और जो प्रजाती नीचे दिए हुए मानदंड पार करती है उस प्रजातीके पक्षीको संकटग्रस्त सूचीमे शामिल किया जाता है।

A - जिनकि संख्यामे पिछ्ले दस सालोमें या पिछली ३ पिढियोंमे ५०% सेभी ज्यादा पतन दिखायी दि गयी हो।

B - जिस प्रजातीके पक्षीयोंका वितरण लगभग ५००० चौकिमी से कम क्षेत्रफ़लमेहि पाया जाता है या फ़िर उनका वाकया कुल ५०० चौकिमी इतने सीमित प्रदेशमेहि दिखायी देता हो ऐसे पक्षी।

C - जिनकि संख्या २५०० या उससे कम प्रौढ पक्षी इतनीहि शेष रह गयी हो।

D - कुछ गणीतीय विश्लेषण अनुसार आनेवाले दस सालोमें या फ़िर अगली ५ पिढियोंमे लगभग २०% या उससे ज्यादा पक्षी उनके नैसर्गिक अधिवाससे नष्ट हो सकते है, ऐसी प्रजाती।

 

३. लुप्त होनेका खतरा होनेवाले Vulnerable (VU): Click here to see the details of the birds under this category

जब कोई वन्य प्रजातीकि नजदिक समयमे उसके नैसर्गिक अधिवाससे लुप्त होनेके समीप नहि रहि जा हो, और लुप्त होनेकि मार्गपरभी नहि चल रहि हो, लेकिन आनेवाले समयमे जिस प्रजातीको नष्ट होनेका खतरा हो सकता है और जो प्रजाती नीचे दिए हुए मानदंड पार करती है उस पक्षी प्रजातीको संकटग्रस्त सूचीमे शामिल किया जाता है।

A - जिनकि संख्यामे पिछ्ले दस सालोमें या पिछली ३ पिढियोंमे २०% सेभी ज्यादा पतन दिखायी दि गयी हो।

B - जिस प्रजातीके पक्षीयोंका वितरण लगभग २०,००० चौकिमी से कम क्षेत्रफ़लमेहि पाया जाता है या फ़िर उनका वाकया कुल २००० चौकिमी इतने सीमित प्रदेशमेहि दिखायी देता हो ऐसे पक्षी।

C - जिनकि संख्या १०,००० या उससे कम प्रौढ पक्षी इतनीहि शेष रह गयी हो।

D - कुछ गणीतीय विश्लेषण अनुसार आनेवाले १०० सालोमें लगभग १०% या उससे ज्यादा पक्षी उनके नैसर्गिक अधिवाससे नष्ट हो सकते है ऐसी प्रजाती।

 

४. न्यूनतम खतरा होनेवाले Lower Risk (LR): Click here to see the details of the birds under this category

जे पक्षी उपर दिये हुए तिनों श्रेणीके मानदंड पार नहि करते लेकिन अगर समयपर ध्यान न दिया गया तो उपरयुक्त किसी एक वर्गमे पारित होनेकि संभावना है। इस श्रेणीके दो प्रतिभाग है।

A - संवर्धनपर निर्भर Conservation Dependent (CD) - जिन पक्षी प्रजातीके अधिवासोंका संवर्धन करना निहायत जरुरि है, और अगर ऐसा न किया गया, तो वह पक्षी उल्लिखित किसी एक श्रेणीमे पहुंचनेकि संभावन होती है, ऐसे पक्षी।

B - लगभग संकटग्रस्त Near Threatened (NT) - जो पक्षी प्रजाती, संवर्धन कार्यक्रमपर निर्भर नहि है मगर फ़िरभी उनको नष्ट होनेका खतरा है, ऐसे पक्षी।

 

५. जिनके बारेमे पूरि जानकरि नहिं है ऐसे Data Deficient (DD): Click here to see the details of the birds under this category

जिन पक्षीयोंके बारेमे सिर्फ़ कुछ इनि गिनी जानकारि है, और उनकि संख्या और वितरण इन घटकोंपर अभीभी संदेह है और जिनके बारेमे परिपूर्ण जानकारि मिलना बहुतहि जरुरि है, ऐसे पक्षी।

 

६. मुल्यांकन न किये गए Not Evaluated (NE): Click here to see the details of the birds under this category

जिन प्रजातीयोंकि उल्लिखित प्रमाणसिद्धता नहि कि गयी हो, ऐसे पक्षी।

 

Dendrogram

 

Recommended citation: Islam, M. Z. and Rahmani, A. R. (2002) Threatened Birds of India. Buceros Vol. 7, No. 1 & 2, 2002. Compiled from Threatened Birds of Asia. Birdlife International Red Data Book (2001). Cambridge, U.K.: BirdLife International

 

© 2008 copyright @ bnhsenvis.nic.in